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एक समय की बात है। एक गांव में एक गरीब लड़की रहती थी जिसका नाम राधा था। उसके माता-पिता बहुत नाराज थे क्योंकि वे सोचते थे कि उनकी लड़की कुछ नहीं कर सकती।
एक दिन, राधा ने सोचा कि उसे दिखाना ही पड़ेगा कि वह कुछ भी कर सकती है। वह आगे बढ़कर रंग-बिरंगे खेतों में खेती करने का फैसला किया। वह पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम करने लगी।
कुछ समय के बाद, नदी के पास एक बड़ी बाढ़ आ गई। सभी किसान तत्परता से अपने फसलों की हिफाजत कर रहे थे। खेतों को बाढ़ से बचाने के लिए एक अभियांत्रिकी उपाय विचारित किया गया। अभियांत्रिक अपनी योजना लागू करने के लिए तालाब के निकट एक बांध बनाने का निर्णय लिया।
सभी किसानों ने इस योजना में धन्यवाद किया और खेतों को बांध के पास ले जाएँ बताया। लेकिन, राधा भी अपने खेतों की चिंता कर रही थी। उसका खेत बांध से बहुत दूर था और वह सोच रही थी कि वह कैसे अपने पौधों का ध्यान रख सकेगी।
बिना सोचे-समझे, राधा ने अपने हाथ में एक खुरची पकड़ी और बांध तक पहुँचने की कोशिश की। हालांकि, पथ बहुत दूर था और बांध में पहुँचने में राधा को बहुत समय लग गया। जब वह बांध पर पहुँची, तब तक उसके खेत की हर फसला उग चुकी थी।
राधा बहुत निराश हो गई। उसे लगा कि वह कभी भी सफलता नहीं प्राप्त कर सकती है। लेकिन फिर राधा ने समझा कि अपनी हार स्वीकार करने से बेहतर है कि उसने कम से कम प्रयास किया है। वह निराश नहीं होना चाहिए क्योंकि उसके प्रयासों ने उसे नये सपनों की राह दिखाई है।
यह गरीबी और सामरिकी कहानी बताती है कि प्रयास करने पर हमेशा सफलता मिलती है। चाहे आपकी स्थिति कितनी भी मुश्किल क्यों न लगे, आपका यथार्थ विश्वास और मेहनत आपको कामयाबी तक पहुँचा सकते हैं।
