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| Source: pngwing |
एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में एक बूढ़ी माँ और उसका बेटा रहते थे. वे बहुत गरीब थे और रोज़मर्रा के लिए जीने के लिए संघर्ष कर रहते थे। उनकी जिंदगी में सभी दिन एक ही रंग दिखाई देता था, उदासी और संकट।
एक दिन, बूढ़ी माँ ने बेटे को कहा, "बेटा, हमें एक ताकतवर देवता की श्रद्धा करनी चाहिए। मेरी दो दोस्तों ने कहा है कि वो पूरे संसार के सभी संकटों को दूर कर सकता है। हमारी दुर्दशा को देखते हुए, वो हमारी सहायता जरूर करेगा।"
बेटा माँ की बात मान गया और उन्हें अपने मित्रों की जगह ले जाने की योजना बनाई। खारिया नदी के पास में एक मंदिर था जहां उन्हें जाना था। दोनों मां-बेटा जुट हो गए और रास्ता भरने के लिए निकल पड़े।
रास्ता तो ज़्यादा लंबा था और दूप की तेज रौशनी में यात्रा थोड़ी कठिन थी। कुछ ही देर में बूढ़ी माँ थक गई और बस्ती के एक रेहड़ीवाले के पास चली गई और उससे ठल बठल के रुपये मांगने लगी।
रेहडीवाला दयालु था और देखते ही उदास महिला को रुपये दिए। योद्धा ने अपने सामान की बजाय शांति और संकट से भरी हुई बेटी को देख रखा और सोच में पड़ गया। वह अपनी लक्ष्मी माता को देखते हुए धन की अपनी सारी स्वर्ण कुंडली उसे दे रही थी। उसने बूढ़ी माँ के पास जाकर सब कुछ दे दिया।
वापस लौटते समय, बूढ़ी माँ अपने बेटे को इतना खुश देखकर हैरान थी। वे कहने लगीं, "बेटा, उस रेहड़ीवाले ने मुझे सब कुछ दे दिया है। मेरी मनोकामना पूरी हो गई है! ऐसा लग रहा है कि हमारे जीवन में अच्छाई की बारिश हो रही है। ये उपहार के अलावा, उस मनुष्य ने मुझे एक मंत्र भी दिया है जिसे सोचने से हर मनोकामना पूरी होती है।"
माता जी ने वह मंगलमय मंत्र अपने बेटे को सिखाया और वे दोनों अपने घर की यात्रा जारी रखते हुए वापस आ गए। कुछ दिनों के बाद, उन्होंने एक सूंड़ी तालाब पर एक बड़ा चोटा सागर बनाया जहां की सभी जरूरतों की आपूर्ति की जाती थी। लोगने उसे "माता जी का तालाब" कहना शुरू कर दिया।
इस कहानी से सीख है कि हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रखिए और कहीं न कहीं जीवन हमें खुद भी वापस इस तरह की बरसात करेगा। खुदा हमेशा अपनी दया और कृपा का उपहार है और हमें केवल उस उपहार का आनंद लेना होता है।
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